जपजी साहिब
ੴ सतिनामु करता पुरखु निरभउ निरवैरु अकाल मूरति अजूनी सैभं गुरप्रसादि ॥ ॥ जपु ॥ आदि सचु जुगादि सचु ॥है भी सचु नानक होसी भी सचु ॥१॥ सोचै सोचि न होवई जे सोची लख वार ॥चुपै चुप न होवई जे लाइ रहा लिव तार ॥भुखिआ भुख न उतरी जे बंना पुरीआ भार ॥सहस सिआणपा लख […]
