आरती
धनासरी महला १ आरतीੴ सतिगुर प्रसादि || गगन मै थालु रवि चंदु दीपक बने तारिका मंडल जनक मोती ॥ धूपु मलआनली पवणु चवरो करे सगल बनराइ फूलंत जोती ॥१॥ कैसी आरती होइ भव खंडना तेरी आरती ॥ अनहता सबद वाजंत भेरी ॥१॥ रहाउ ॥ सहस तव नैन नन नैन है तोहि कउ सहस मूरति नना […]
