सलोक महला ९
ੴ सतिगुर प्रसादि ॥सलोक महला ९ ॥ गुन गोबिंद गाइओ नही जनमु अकारथ कीनु ॥कहु नानक हरि भजु मना जिह बिधि जल कउ मीनु ॥१॥ बिखिअन सिउ काहे रचिओ निमख न होहि उदासु ॥कहु नानक भजु हरि मना परै न जम की फास ॥२॥ तरनापो इउ ही गइओ लीओ जरा तनु जीति ॥कहु नानक भजु […]
